बहुत कुछ
कुछ ऐसे फस गए जिंदगी की क़शमक़श में
न कहने को कुछ रहा न सुनने को
रिश्तो की उलझन कुछ ऐसी आ गयी
सिमट कर रह गया सब कुछ पर
बिखर भी गया बहुत कुछ
सोचने का वक्त भी न मिला
पर गुजर गया बहुत कुछकभी खयालो में दिन गुजर जाते थे
आज एक लम्हा भी भारी लगता है
और उजड़ गया तुम बिन बहुत कुछ
करते रहे इन्तजार तुझे भूल जाने का
मगर तुम याद आते रहे और
भूल गया बहुत कुछ
राहो में तुझे ढूंढते रहे, तलाशते रहे
न तू मिला न ख़त्म हुई तेरी तलाश
पर बिछड़ गया बहुत कुछ
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