बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

Yaad....







आज फिर से तेरी यादों ने मुझे रुलाया  है 
आज फिर से मुझे तेरी याद  आयी हैं 
हर तरफ ख़ामोशी है, उदासी है ...... 
आंसू है और सिर्फ तेरी याद है, 
दिल में एक कसक है...तुमसे मिलने  का 
आज फिर मेरे लब  खामोश है ,
आँखे भर आयी है क्योकि। ... 
आज फिर मुझे तेरी याद आयी है 
जाने क्यों आज भी मेरी धड़कनो में तू समाया है 
जाने क्यों आज भी तेरे नाम से ये दिल धड़कता है 
मालूम है मुझे तुम  कही नहीं हो फिर भी तेरा इंतजार है 
ये इंतज़ार कही ख़त्म हो जाए 
ये साँसे कही बंद हो जाए 
और ये प्यार रह जाये  इंतज़ार बन कर 

रविवार, 31 दिसंबर 2017

तेरे इंतज़ार में ............




ढल जाती है हर शाम तेरे इंतज़ार में.........

थक जाती है ये नजर तेरे इंतजार में........... 

जब भी मिलते हो तुम ख़्वाबों   में....... 

जीने का सहारा मिल जाता है..........

ख़्वाबों में ही सही पर तेरी बांहो ....

का सहारा  मिल जाता हैं......

वादा करते हो हर सुबह मिलने का पर,

ख़्वाब टूटते ही वादा टूट जाता हैं.....

और फिर ये दिल खो जाता है तेरे इंतज़ार में..... 

मेरी साँसों में बसे  हो तुम ,

मेरी हर धड़कन में हो तुम ,

पलकें बंद करुँ तो तुम ही नजर आते हो..... 

ये हकीकत नहीं एक ख़्वाब है, 

खो जाऊ मैं उस कभी न ख़त्म होने वाली .....

ख़्वाबों  की दुनिया में जिसमे बसा हो .....

मेरा प्यार..... और जहा सिर्फ तुम हो मैं हूँ......

और हमारा प्यार, हमारी चाहत,

गले लगा लूँ  मैं तुमको जी भर के 

छुपा  लूँ मैं तुमको अपने आँचल में 

बंद कर लूँ अपनी पलकों में 

हमेशा -हमेशा के लिए ..... क्योंकि 

कही ऐसा न हो की...... 


बंद  हो जाये मेरी साँसे  तेरे इंतज़ार में ...... 

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

ख्वाहिशें ......





चलो ख्वाबों की तश्तरी मे कुछ लम्हे परोसे और
उन लम्हो मे पूरी करे कुछ अधूरी ख्वाहिशें ....
कुछ अधूरे सपने, कुछ अधूरी चाहते .....
उन लम्हो मे जी ले एक सुरमई शाम,
देखे ढलते हुये सूरज को खो जाए एक दूसरे मे उस ढलती हुयी
शाम के साथ .....
ढुढ़े खुद को अपने अक्स मे या फिर ख्वाहिशों की सिलवटों मे
एक दूसरे को करे महसूस और याद करे उन बीते हुये लम्हे को
जो गुजारे  थे हमने एक साथ ..........
चलो बिताए कुछ पल  उन लम्हो के साथ...
पूरी करले अपनी ख़्वाहिशों को उन ख्वाबो की तश्तरी मे,
बड़े दिनो बाद मिले हो...  ख्वाबों मे चलो कुछ गुफ़्तुगु कर ले, 
जी ले अपनी जिंदगी, कुछ रह न जाए कमी ... इसीलिए 
चलो कुछ लम्हे परोसे उन ख्वाबो की तश्तरी  मे ..........
 
 
 

गुरुवार, 16 नवंबर 2017

नहीं हो तो तुम.....





 

 
 
तेरी बातें  तेरी यादें सब कुछ है साथ मेरे...
.............बस नहीं हो तो तुम ।
हर पल तेरी यादों का कारवां  रहता है,
हर पल तेरे प्यार का साया रहता है,
तेरी बाते  तेरी मुस्कुराहटें सब है साथ मेरे...
...............बस नहीं हो तो तुम ।
तेरा रूठना मेरा मनाना सब याद हैं,
कितने नादां थे हम  जो ऐसे रुठा करते थे ,
कितने हसीन पल थे वो जब हम साथ  थे ,
वो नादानियाँ वो पल सब साथ है मेरे...
..............बस नहीं हो तो तुम ।
जो पलकें कभी भीगी थी तेरे दूर चले जाने पर,
आज भी तुम्हें याद करके मेरी पलकें  नम हो जाती है
तेरी यादों का कारवां मुझे ले जाता है अपने साथ
फिर खो जाती हूँ मैं तेरी यादों की गली मे ,
वो यादों की गलियाँ , वो भीगी पलकें सब हैं मेरे साथ...
................बस नहीं हो तो तुम ।
 
 
 
 
 
 

 

 

शुक्रवार, 3 नवंबर 2017

तुम मिले .....





कुछ तो जुड़ रहा था तेरे दिल से मेरे दिल तक जब तुम मिले थे ...

कुछ तो मिल रहा था तेरे मन से मेरे मन तक जब तुम मिले थे ,

हर लम्हा मेरा  ठहर गया था जब तुम मिले थे ..

उस वक्त मे कुछ तो खास रहा होगा  जब तुम मिले थे ...

बरस रही थी हर तरफ प्यार की बुँदे जब तुम मिले थे ...

हो रहा था कुछ अजीब सा एहसास जब तुम मिले थे ...

तेरी  झुकी पलके कर रही थी कुछ इशारे जब तुम मिले थे ..

कुछ तो अलग था तेरे दिल की धड़कन मे  जब तुम मिले थे ...

कितनी बेताब थी मेरे दिल की धड़कन जब तुम मिले थे...

बदलने  लगे मेरे ख्वाब  हकीकत मे जब तुम मिले थे ...

जीना आ गया था मुझे पाकर साथ तुम्हारा जब तुम मिले थे  ...

रश्क था मुझे अपने नसीब पर की मुझे तुम मिले सिर्फ तुम मिले .....|

 

 

 

 
 

बुधवार, 11 अक्टूबर 2017

दो मुसाफिर...



अलग –अलग   राहो के दो मुसाफिर है हम

फर्क सिर्फ इतना है .... अकेले तु भी है अकेले मै भी......

जाना  तुझे भी है , जाना  मुझे भी है |

रास्ते अंजान  है मंजीले भी दूर ...

चलना  तुझे भी है चलना  मुझे भी है ...... 
 
जिन राहो  पर चलना था तेरे साथ

जिस मंजिल की तलाश थी तेरे साथ

उसे अब तन्हा ही...........

पाना तुझे भी है पाना मुझे भी है ......

माना अलग है हमारी राहे

अलग है हमारी मंज़िले

फिर भी अपनी यादों

के कारवां  के साथ- साथ  ..........

चलना  तुझे भी है चलना  मुझे भी है.......

जिंदगी का सफर.....





 ये जिंदगी का सफर कुछ अजीब है…..  

हर पल लगता है की मंजिल अपने कितनी करीब है |

पर देखो तो सब कुछ बहुत  अजीब है….

कभी आंखो मे आँसू आते है तो कभी लबो पे हंसी

जीवन का  हर लम्हा ही कुछ अजीब है ….

इस सफर मे कुछ रिश्ते टूट जाते है,

तो कुछ रिश्ते जुड़ भी जाते है,

कुछ अपने बेगाने हो जाते है तो......

कोई बेगाना अपना हो जाता है,

इसका हर लम्हा ही कुछ अजीब सा है....

कुछ यादें इन लम्हो मे खो जाती है,

कुछ लम्हे यादें बन कर रह जाती है...

कुछ सवाल बन जाते है किसी के जवाब में,

कुछ जवाब उलझ  जाते है किसी के सवालो में....

इसका हर सवाल ही अजीब सा हैं ...

ये सफर कहा खतम हो कौन जानता है..

फिर भी सब चलते है, चलते रहते  है ...

किसी के इंतजार मे आगे बढ़ते रहते  है कि ..

राह मे शायद कोई मिल जाए हमसफर बनकर...

और ये सफर कट जाये गीत बनकर ...

 खुशियाँ  ख्वाब बन  कर आंखो मे बस जाए...

इसक हर लम्हा खूबसूरत बन जाएँ ......