बुधवार, 4 अप्रैल 2018

तुम मेरा प्यार हो





तुम मेरा प्यार हो तुम मेरा एहसास....

बन जाओ मेरे अल्फ़ाज़.... 
मैं  तुमको अपनी आवाज बना लूँ |


बसा कर अपनी आँखों में..... 
तुम्हे अपना ख्वाब बना लूँ |

छुपा लूँ अपने दिल में .....
तुम्हे अपना राज बना लूँ |

देकर तुमको ढेर सारा  प्यार .....
तुम्हे अपना हमराज बना लूँ |

रहो तुम हर पल मेरे साथ .....
मैं तुमको अपनी जान बना लूँ |

पुरे कर लूँ मैँ अपने सपने तुम्हारे साथ... 
मै तुमको  अपना अरमान बना लूँ |

बुधवार, 28 मार्च 2018

यादों की गलियों





यादों की गलियों में जाकर देखा..... 
          कुछ मिला तेरी यादो के सिवा |

दिल के झरोखो में झांक कर देखा ....
         कुछ मिला तेरी चाहतो के सिवा |

मन के बाग़ों में भी   देखा वहाँ भी ......
        कुछ मिला तेरी खुश्बू के सिवा |

जहाँ बिछड़े थे हम उन राहो  को देखा..... 
       कुछ मिला तेरे कदमों के निसा के सिवा |

ढूंढती रही मै अपने अंदर खुद को..... 
      मुझे तू ही मिला मेरे अंदर मेरे सिवा |

आँखे बंद करके सपनो में देखा.... 
     वहाँ   भी कुछ मिला तेरे ख्वाबों के सिवा |

मेरे अंदर ये तेरा वजूद है या ... 
     तेरी चाहत का असर ....

 मेरे पास कुछ भी नहीं है ....
     एक तेरी मुहब्बत के सिवा |

दूर हो गए तुम मुझसे पर... 
   दूर ना  हो पाया मुझसे तेरा एहसास,

और.... 

   मेरे पास कुछ भी नहीं तेरे एहसास के सिवा.....   


मंगलवार, 27 मार्च 2018

किसने बांध रखा है









किसने बांध रखा है बंधन मे...

मन कहता है नील गगन मे |

उड़ जाऊ मै पंछी बनकर...

दूर - दूर तक पंख पसारे |

उड़ती जाऊ बादल बन कर...

मै असीम बन जाऊ साथी |

ऐसी अभिलाषा  है मन मे...

माया का है जाल  तोड़ना...

लोभ मोह से भी बचना है |

जड़ता छूटे, शुद्ध चेतना....

साथी पथ पर चलना है |

सत्य सदा अपनाना होगा ...

स्वाश- स्वाश मे धड़कन मे....

किसने  बांध रखा है..... 



रविवार, 25 मार्च 2018

कितनी राते बीत गयी





तुमसे जुदा हुये मन मीत

कितनी राते बीत गयी....

पथ मे तेरे आँख पसारे

कितनी राते बीत गयी....

वक्त भले ही गुजरा हो

 तस्वीरों पर  कोई धूल नहीं है...|

यादें अब भी ताजा है...

दिल मे अब भी प्रीत वही हैं....

पलको पर मोती उलझाएँ...

कितनी राते बीत गयी....

किस्मत मेरी ऐसी रूठी....

वादे टूटे, कसमें झूठी....

मुझसे कितने दूर गए तुम....

पर, मिलने की आस न छूटी....

मन के महल मे दीप जलाए....

कितनी राते बीत गयी.....|


बुधवार, 21 फ़रवरी 2018

जब भी अकेली होती हूँ ....





होती है शाम जब भी आ जाती है तेरी यादें 
मुझको रुला - रुला  जाती हैं तेरी यादें। ...... 
जब भी अकेली होती हूँ, याद आ जाती है तेरी यादें...
फिर वही बीती  बातों की  याद  दिला जाती तेरी यादें
कभी होठो पर मुस्कान बनकर, मुझको हँसा  जाती है तेरी यादें
तो कभी आँखों मे आँसू बनकर रुला जाती है तेरी यादें.....
सोचती हूँ कभी अगर बह सकती आसुओं से ये यादें ...
तो जी भर के रो लेती मैं ......और फिर कभी ना सताती मुझको
तेरी यादें........जब भी अकेली होती हूँ ....