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शुक्रवार, 24 नवंबर 2023

अभी अमावस है ....

 


माना अभी अमावस है 

अंधेरा है उदासी है 

मगर तुम तो मेरे चांद हो 

तुम्हे तो आना ही होगा 

तुम्हारी पहचान ही 

रोशनी है तुम्हारा होना ही 

चांदनी है 

तुमसे ही पूर्णिमा है 

और मेरा जीवन भी 

तुमसे ही पूर्ण होता है 

तुम्हे तो आना ही होगा ...

यादें बहुत तंग करती है मुझे 

खालीपन बहुत रुलाता है 

सब आस पास है फिर 

अकेलापन बहुत सताता है 

कहना है बहुत कुछ तुमसे 

बहुत कुछ बताना है इसलिए 

तुम्हे तो आना ही होगा ... 

टूट चुकी हूं भीतर से 

खो चुकी हूं खुद को 

तेरे आने की आस में 

तेरे इंतजार में बस 

एक मुलाकात के लिए 

तुम्हे तो आना ही होगा ....

खत्म कर दो अब 

अमावस को 

बिखर जाओ बन कर 

रोशनी पूर्ण हो जाऊं मैं 

खो जाऊं तेरी चांदनी ने 

भरने मुझे अपनी बाहों में 

तुम्हे तो आना ही होगा 

किसको मैं बतलाऊ ..

 



किसको मैं  बतलाऊ ..।


मैं खुद को भूल गई 
ये किसको समझाऊं
मेरी नज़रे मुझसे ही 
मेरे मन की बाते छुपाती है 
राते भीगी भीगी सी 
आंखो में ही बीत जाती है
उन भीगे-भीगे लम्हों को
किसको मैं दिखलाऊं 
कितना विचलित है मन 
किसको मैं बतलाऊं ...।

लड़ती रहती हूं मन से 
रूठी रहती हूं खुद से 
छुपा आंसू मुस्कुराती हूं 
सबको खुश दिखलाती हूं
दिल से कैसे मैं मुस्कुराऊं 
कितना विचलित है 
किसको मैं बतलाऊं ,....।

कहती हूं हर पल 
सबसे समझाती हूं
सबको हर पल 
जो है ठीक है
जैसा है ठीक है 
वक्त बीत रहा है 
समय गुजर रहा हैं
खुद को कैसे समझाऊं
कितना विचलित है मन
किसको मैं बतलाऊँ  ,....।

रिश्तों से समझौता 
ख्वाबों से समझौता 
वक्त से समझौता 
हालात से समझौता 
जीवन एक समझौता है 
या समझौता एक जीवन 
अब मैं भी ये  समझ ना पाऊं
कितना विचलित है मन 
किसको मैं बतलाऊं..... ।।

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2023

जिंदगी की किताब .....

 



जिंदगी की किताब में

कुछ  पन्ने खाली 

रह जाते तो अच्छा होता 

खाली पन्नो पर हम ढूंढ

लाते खुशी और 

थोड़ी हसी को 

गम को दूर कही छोड़

आते वीराने में 

आंसुओ को बंद कर देते 

पिछले पन्ने पर 

बंद कर देते उस पन्ने को 

हमेशा के लिए 

कुछ खाली पन्नो पर 

लिखते कोई खूबसूरत सी 

गजल तुम्हारे नाम की 

सजा देते अपने नगमों से 

उन खाली पन्नो को 

एक कहानी लिखते 

जिसमे तुम, तुम नही 

मैं, मैं नही दोनो 

मिलकर हम होते 

काश की जिंदगी के 

कुछ पन्ने खाली होते ।।

 

सदैव तुम्हारी......


सदैव रहोगे मेरे 

यही कहा था ना तुमने 

साथ पूरा करोगे ये 

जीवन का सफर 

यही बोला था ना तुमने 

बन कर मेरी परछाई 

रहोगे संग

थाम कर हाथ चलोगे संग 

यही सोचा था ना तुमने 

लेकिन देखो वक्त 

कहा लेकर आया 

तुम मेरे होकर भी 

मेरे नही हो और 

मैं अभी तक सिर्फ 

तुम्हारी ही हूं

सदैव तुम्हारी ||

गमों की दीवार ....

 



कुछ गमों की दीवार है

गिराना चाहती हूं 

ऐ जिंदगी तुझे फिर से

गले लगाना चाहती हूं ।

 

जी लेना चाहती हूं 

एक बार फिर से 

पूरी उम्मीद के साथ 

हौसली के साथ 

उड़ जाना चाहती हूं

ऊंचा बहुत ऊंचा

अपने पंखों के साथ 

जहा कोई बंधन ना हो 

जहा कोई पा ना सके 

कोई छू ना सके

मेरे मन को 

मेरे सपने को 

फिर से मुस्कुराना चाहती हूं 

ऐ जिंदगी तुझे फिर से

गले लगाना चाहती हूं ।

 

मचल जाना चाहती हूं 

तितली की तरह 

महक जाना चाहती हूं 

फूलों की तरह 

खुशबू बन कर फिर से 

बिखर जाना चाहती हूं 

ऐ जिंदगी तुझे फिर से 

गले लगाना चाहती हूं ।

 

बह जाना चाहती हूं 

चंचल नदी की तरह 

समा जाना चाहती हूं 

समंदर की बाहों में 

छू कर किनारों को 

बस दूर कही निकल 

जाना चाहती हूं 

ऐ जिंदगी तुझे फिर से 

जी लेना चाहती हूं ।।

 

बुधवार, 29 सितंबर 2021

खुद की तलाश....

खुद की तलाश

खुद को पाने की चाह 

क्यों ऐसा होता है 

तलाश खतम नही होती 

और उम्र गुजर जाती है 

सब पीछे छूट जाता है 

आस फिर भी रह जाती है 

तड़प रह जाती है 

खुद को पाने की        

आस्मा में पंख फड़फड़ाने की 

जब देखती हूँ आईना 

खुद का अक्स भी खुद से 

दूर नजर आता है 

जो देख कर मुझे 

सिर्फ मुस्कुराता है 

 रिश्तो से जकड़ा हुआ 

और बंधनो से बंधा हुआ

पाती हूँ खुद को अब तो 

एक ख्वाब की तरह 

जो आंख खुलते ही 

कही गायब हो जाता है 

रह जाता है तो मेरा 

 खोया हुआ वजूद जो 

खुद की तलाश में 

तन्हा भटक रहा है ।