बुधवार, 7 फ़रवरी 2024

तुमसे प्रेम है .....

 


तुमसे प्रेम है 

अगर ये कहूं तो 

ये शब्द है ...

शब्दो से मैं कैसे 

बयां करु अपने प्रेम को 

जो सांसे 

से चल रही है ना 

वो तुम्हारे लिए है 

आंखो में जो ख्वाब है 

वो तुम्हारे है 

मैं कुछ कहूंगी नही तुमसे 

बस जब भी मिलना 

पढ़ लेना मेरी आंखो को 

सुन लेना मेरी धड़कनों को 

और समझ जाना की 

प्रेम को  शब्दों में 

बयां करना आसान नहीं ।।

 

अपनी व्यथा .....

 


क्या कहूं तुमसे अपनी व्यथा 

एक छोटी सी ही तो है कथा 

मैं से मैं पर शुरू होकर हम 

बनी और मैं से मैं और 

तुम से तुम पर आकर 

समाप्त ....

कथा जारी है मिलने से बिछड़ने 

तक की कहानी लेकर 

ना जाने कितने दिन या साल 

और जायेंगे तुम्हे भूलने में 

या शायद हम खुद मिट जाए 

तुम्हे भूलाने में ...

संभव नही की दुबारा मिलना हो 

गर मिल भी जाए तो क्या 

फिर बिछड़ जायेंगे एक नई 

कहानी के साथ 

फिर क्या ....

दिल में एक टीस उठेगी 

आंसुओ की धार बहेगी 

एक दूसरे को अलविदा कह 

फिर से मिलने की दुआ करेंगे 

सिलसिला जारी रहेगा 

अंतिम सांस तक ...।।

"मैं " से "हम "

 


निकल सको कभी अपने 

"मैं " से निकल कर 

आना मिलने तब कुछ 

सपने पूरे करेंगे "हम "

भूल सको तो भूल जाना 

एक पल "मैं " को 

आना मिलने तब 

साथ मिलकर जिएंगे "हम

मन करे कभी

हम बनकर जीने को 

आना मिलने तब

लगकर गले से जी भर के 

रोएंगे "हम

खो सको कभी 

अपना वजूद किसी में 

आना मिलने तब 

बन कर साया नजर 

आयेंगे "हम

जब तुम "तुम" नही होगे 

मैं "मैं" नही रहूंगी 

तब मिलकर एक नई 

दुनिया बसाएंगे "हम" ।।

 

 


तुम्हारी प्रतीक्षा


 


तुम्हारी प्रतीक्षा जीवन के 

अंतिम सांस तक रहेगी 

मेरे जीवन का अंतिम पड़ाव 

तुम्हें प्राप्त कर तुम में 

मिल जाना है 

मेरी कुछ सांसे उधार है 

तुम पर बस उन सांसों 

को जी लूं फिर कोई 

शिकायत नही होगी ।।